०४ मार्च २०१४ आज कि की कविता .
डॉ प्रमोद कुमार दीक्षित
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मूल भावना पर दुनिया के दार्शनिक
पता नहीं क्या क्या कह गए
सुन सुन कर हम परेशां हो गए
भूख,प्यास नींद ,सेक्स
ये सब पढ़ते पढ़ते ज़माने बीत गए
कोन बताये इन्हे ,मूल भावना है
सिर्फ और सिर्फ प्रेम
ये होता है या फिर नहीं होता
बस,इतनी सी बात है.
प्रेम न हो पानी से तो पी कर दिखाएं
इसके बिना खाना खा कर दिखाएं
प्रेम ही है मॉउल भावना
जो मीरा ने किया ,राधा ने किया
सिमोन डी बुवा ,अमृता प्रीतम ने किया
दांते बीट्रिस ने किया,तुमने किया ,हमने किया
भूख प्यास नींद सेक्स सब भूल कर किया
बस समर्पण किया अपने आप का
स्वत्व् का ,महामिलन के लिए ,मोक्ष जिसे कहते है
डॉ प्रमोद कुमार दीक्षित
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मूल भावना पर दुनिया के दार्शनिक
पता नहीं क्या क्या कह गए
सुन सुन कर हम परेशां हो गए
भूख,प्यास नींद ,सेक्स
ये सब पढ़ते पढ़ते ज़माने बीत गए
कोन बताये इन्हे ,मूल भावना है
सिर्फ और सिर्फ प्रेम
ये होता है या फिर नहीं होता
बस,इतनी सी बात है.
प्रेम न हो पानी से तो पी कर दिखाएं
इसके बिना खाना खा कर दिखाएं
प्रेम ही है मॉउल भावना
जो मीरा ने किया ,राधा ने किया
सिमोन डी बुवा ,अमृता प्रीतम ने किया
दांते बीट्रिस ने किया,तुमने किया ,हमने किया
भूख प्यास नींद सेक्स सब भूल कर किया
बस समर्पण किया अपने आप का
स्वत्व् का ,महामिलन के लिए ,मोक्ष जिसे कहते है





![Photo: २८ फरबरी २०१४ ..आज की कविता
डॉ प्रमोद कुमार दीक्षित
कुछ हल्का फुल्का हो जाये
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हमें तुमसे प्यार कितना ये हम नहीं जानते
[तो क्या पडोसी जाने गे जो सारे नज़ारे झांकते रहते है]
मगर जी नहीं सकते तुम्हारे बिना
[ये "मगर"तुम्हारे बिना क्यों नहीं जी सकते?]
तेर जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया
[अब में क्यों कमाऊ ,सब मेरा हो गया ]
तेरे आने कि जब खबर महके
[डीओ लगाया करो यार ]
तुम मुझे यु भुला न पाओगे
[उधार ले कर जा रहा हू.वसूल न पाओगे]
तू जहा जहा चलेगा ,मेरा साया साथ होगा
[वसूल तो लूगा ही सेल्स टैक्स वाला हू]](https://fbcdn-sphotos-b-a.akamaihd.net/hphotos-ak-prn2/t1/s403x403/1511052_706225736065868_364471422_n.jpg)
